विष्णु सहस्रनाम एक पवित्र स्तोत्र है जिसमें हिंदू त्रिमूर्ति में पालनकर्ता माने जाने वाले भगवान विष्णु के एक हजार नामों का उल्लेख है, जो महाभारत के अनुशासन पर्व में पाया जाता है। प्रत्येक नाम परमात्मा के किसी गुण या विशेषता का वर्णन करता है — सृष्टिकर्ता, पालनहार, सर्वव्यापी, समस्त अस्तित्व के स्रोत और धर्म के मूर्तिमान स्वरूप के रूप में। परंपरागत रूप से एकादशी और अन्य शुभ दिनों पर पाठ किया जाने वाला यह स्तोत्र वैष्णव परंपरा में भक्ति की सबसे शक्तिशाली और संपूर्ण अभिव्यक्तियों में से एक माना जाता है, जिसके बारे में मान्यता है कि श्रद्धा और समझ के साथ इसका जाप करने वालों को शांति, समृद्धि और कठिनाइयों से सुरक्षा मिलती है। धार्मिक कर्मकांड से परे, विद्वान विष्णु सहस्रनाम को एक गहन दार्शनिक ग्रंथ भी मानते हैं, क्योंकि इसके कई नाम किसी व्यक्तिगत रूप का नहीं बल्कि ब्रह्मांड के मूल में स्थित परम सत्य के निराकार स्वरूप का वर्णन करते हैं — जो इसे भक्ति के साथ-साथ परम सत्य पर एक गहन चिंतन भी बनाता है।