हनुमान चालीसा भगवान हनुमान को समर्पित चालीस चौपाइयों की एक भक्ति रचना है, जिसकी रचना सोलहवीं शताब्दी में संत तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में की थी। यह स्तोत्र भगवान राम के प्रति हनुमान जी की अटूट भक्ति, रामायण में उनके वीरतापूर्ण कार्यों और भक्तों के जीवन से भय, बाधाएं और नकारात्मकता दूर करने वाले रक्षक के रूप में उनकी भूमिका का वर्णन करता है। लाखों भक्त प्रतिदिन, विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, यह विश्वास करते हुए कि इससे साहस, मानसिक शांति और कठिनाइयों से सुरक्षा मिलती है। इसकी लयबद्ध और सरल चौपाइयां इसे हर आयु वर्ग के लोगों के लिए सुलभ बनाती हैं। नियमित पाठ अनुशासन, विनम्रता और जीवन की चुनौतियों के सामने अडिग आस्था विकसित करने का एक सरल किंतु प्रभावशाली माध्यम माना जाता है।